Nov 04, 2026
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उत्तराखंड में ई-गवर्नेंस का नया अध्याय: अब हर परिवार को मिलेगी 'देवभूमि परिवार आईडी

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देहरादून। उत्तराखंड के नागरिकों को सरकारी योजनाओं का सीधा, पारदर्शी और त्वरित लाभ पहुँचाने की दिशा में राज्य की पुष्कर सिंह धामी सरकार ने एक युगांतरकारी कदम उठाया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 'विकसित उत्तराखंड विजन-2047' को जारी करने के साथ ही बहुप्रतीक्षित 'देवभूमि परिवार पोर्टल' का भव्य शुभारंभ कर दिया है। इस डिजिटल क्रांति के तहत अब प्रदेश के हर परिवार को एक विशिष्ट 'देवभूमि परिवार आईडी' प्रदान की जाएगी। इस एकल पहचान व्यवस्था के लागू होने से राज्यवासियों को बार-बार प्रमाण पत्र जमा करने और विभिन्न सरकारी दफ्तरों के अनगिनत चक्कर काटने की जटिल समस्या से हमेशा के लिए निजात मिल जाएगी।

उत्तराखंड में सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए बार-बार दस्तावेज जमा करने और अलग-अलग सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटने की परेशानी से नागरिकों को राहत दिलाने की दिशा में राज्य सरकार ने नई पहल की है। अब प्रदेश के प्रत्येक परिवार को एक विशिष्ट पहचान देने के लिए ‘देवभूमि परिवार आईडी’ की व्यवस्था शुरू की जा रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देवभूमि परिवार पोर्टल का शुभारंभ कर इस व्यवस्था की शुरुआत की है। इसके माध्यम से राज्य के प्रत्येक परिवार और उसके सदस्यों का आवश्यक विवरण एक ही स्थान पर उपलब्ध रहेगा। सरकार का दावा है कि इससे सरकारी योजनाओं का लाभ सही पात्र व्यक्तियों तक पहुंचाने, प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता लाने और विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने में मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री ने देवभूमि परिवार पोर्टल के साथ विकसित उत्तराखंड विजन-2047 भी जारी किया। सरकार की इस पहल का उद्देश्य प्रदेश में सरकारी सेवाओं को अधिक सरल, पारदर्शी और नागरिकों के लिए सुविधाजनक बनाना है। अभी तक विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए लोगों को अलग-अलग विभागों में अपनी पहचान, परिवार की स्थिति और पात्रता से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत करने पड़ते हैं। कई बार एक ही जानकारी अलग-अलग कार्यालयों में उपलब्ध कराने की जरूरत पड़ती है। नई व्यवस्था में परिवार की एक विशिष्ट पहचान होने से इस प्रक्रिया को आसान बनाने की योजना है। देवभूमि परिवार पोर्टल पर पंजीकरण कराने के बाद प्रत्येक परिवार को एक विशिष्ट देवभूमि परिवार आईडी प्रदान की जाएगी। इसके माध्यम से परिवार और उसके सदस्यों से संबंधित जानकारी एक ही जगह उपलब्ध होगी। इससे विभिन्न सरकारी योजनाओं के लिए पात्रता निर्धारित करने में विभागों को सुविधा होगी। साथ ही लाभार्थियों की पहचान और योजनाओं के क्रियान्वयन की प्रक्रिया भी अधिक व्यवस्थित हो सकेगी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के अनुसार, इस व्यवस्था से नागरिकों को बार-बार एक जैसे दस्तावेज जमा कराने और सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने की समस्या से राहत मिलेगी। परिवार से संबंधित जानकारी एकीकृत होने के कारण विभिन्न विभागों के बीच तालमेल बेहतर होगा और सरकारी योजनाओं का लाभ जरूरतमंदों तक पहुंचाने में आसानी होगी। नई व्यवस्था से आम नागरिकों को कई सुविधाएं मिलने की उम्मीद है। इनमें सबसे प्रमुख लाभ बार-बार दस्तावेज जमा करने की जरूरत कम होना है। परिवार का विवरण एक ही स्थान पर उपलब्ध रहने से सरकारी योजनाओं के लिए पात्र लाभार्थियों की पहचान आसान होगी। अलग-अलग विभागों में जानकारी जुटाने की प्रक्रिया सरल होगी और योजनाओं की निगरानी भी बेहतर तरीके से की जा सकेगी। इसके अलावा सरकारी संसाधनों का आवंटन जरूरत और पात्रता के आधार पर करने में सहायता मिलेगी। विभागों के बीच सूचनाओं का बेहतर आदान-प्रदान होने से योजनाओं को लागू करने में होने वाली प्रक्रियागत परेशानियां कम करने में मदद मिल सकती है। प्रमुख सचिव (योजना) आर. मीनाक्षी सुंदरम ने बताया कि देवभूमि परिवार पोर्टल के प्रभावी संचालन के लिए राज्य स्तर पर देवभूमि परिवार प्राधिकरण गठित करने का प्रस्ताव रखा गया है। इसके साथ ही जिला स्तर पर जिला देवभूमि परिवार अधिकारी नियुक्त करने का प्रस्ताव भी शामिल है। इससे योजना के संचालन और निगरानी के लिए राज्य से लेकर जिले तक प्रशासनिक व्यवस्था विकसित की जा सकेगी। उन्होंने बताया कि विकसित उत्तराखंड विजन-2047 के तहत भी विभिन्न क्षेत्रों के लिए दीर्घकालिक लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं। इन लक्ष्यों की प्रगति पर नजर रखने के लिए लगभग 440 संकेतकों के माध्यम से निगरानी की जाएगी। देवभूमि परिवार आईडी को सरकारी सेवाओं के डिजिटलीकरण और परिवार आधारित योजनाओं के बेहतर संचालन की दिशा में महत्वपूर्ण प्रशासनिक पहल के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, इसकी वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि परिवारों का पंजीकरण कितना सरल रखा जाता है, आंकड़ों की शुद्धता और गोपनीयता कैसे सुनिश्चित होती है तथा पात्र नागरिकों को योजनाओं का लाभ बिना किसी तकनीकी बाधा के मिल पाता है या नहीं। यदि व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू होती है तो उत्तराखंड में सरकारी सेवाओं तक आम नागरिकों की पहुंच आसान बनाने में यह नई पहचान महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।