Apr 18, 2026

क्या लैंसडौन अपना आकर्षण खो रहा है? बुनियादी सुविधाओं की उपेक्षा नाम बदलने के नैरेटिव पर क्यों भारी पड़ रही है?

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लैंसडौन। उत्तराखंड की विश्वप्रसिद्ध पर्यटन नगरी लैंसडौन इन दिनों अपनी खूबसूरती के बजाय 'नाम बदलने' की कवायद को लेकर चर्चाओं के केंद्र में है। ब्रिटिश काल के नामों को बदलने की सरकारी मुहिम के तहत लैंसडौन का नाम भी सूची में शामिल है, लेकिन इस फैसले ने स्थानीय जनता और जानकारों के बीच एक नई बहस छेड़ दी है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या सिर्फ नाम बदल देने से इस ऐतिहासिक नगर का खोया हुआ गौरव वापस लौट पाएगा?

पर्यटन लैंसडौन की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और इससे सरकार को सालाना करोड़ों का राजस्व मिलता है। विडंबना यह है कि ब्रिटिशकालीन 'कैंट एक्ट' की बंदिशों के कारण यहाँ पर्यटकों के लिए बुनियादी सुविधाओं का विस्तार नहीं हो पाया है। राज्य गठन के बाद से इस नगर ने एक के बाद एक दर्जन से अधिक सरकारी कार्यालयों का पलायन देखा है। आज यह नगर रोजगार और स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए तरस रहा है। स्थानीय जनता का मानना है कि सरकार को नाम बदलने से ज्यादा ध्यान यहाँ की मूलभूत सुविधाओं के विस्तार पर देना चाहिए। पूरी तरह कैंट शासित होने के कारण लैंसडौन में विकास का पहिया जाम है। बजट कटौती ने कैंट बोर्ड की कमर तोड़ दी है, जिससे नियमित और संविदा कर्मचारियों को वेतन तक नहीं मिल पा रहा है। विकास योजनाएं फाइलों से बाहर नहीं निकल पा रही हैं, जिसके परिणामस्वरूप पिछले एक दशक में पलायन यहाँ की सबसे बड़ी समस्या बन गई है। यह पहली बार नहीं है जब नाम बदलने की मांग उठी है। पूर्व में इसे इसके पौराणिक नाम 'कालौडांडा' करने की मांग हो चुकी है। इसके अलावा, लाट सूबेदार बलभद्र सिंह नेगी और देश के पहले सीडीएस स्व. जनरल विपिन रावत के नाम पर भी नगर का नाम रखने की चर्चाएं होती रही हैं। वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. एसपी नैथानी का कहना है कि "लैंसडौन" सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि लोगों की भावनात्मक पहचान है। पीढ़ियों से लोग इस नाम से जुड़े हैं। यदि भविष्य में नाम बदलने की जबरन कोशिश हुई, तो इसका कड़ा विरोध किया जाएगा। प्रशासन ने सार्वजनिक नोटिस जारी कर सुझाव और आपत्तियां तो मांगी हैं, लेकिन लैंसडौन की जनता के मन में यह संशय बरकरार है कि नाम बदलने से उनकी रोजी-रोटी और नगर की बदहाली का समाधान कैसे होगा। क्या पहचान बदलने से पलायन रुकेगा? यह एक अनुत्तरित प्रश्न है।