Jul 22, 2026

मुख्यमंत्री कल्याण पहल के तहत महिला उद्यमियों को समय पर मिली आर्थिक सहायता

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देहरादून। उत्तराखंड में महिला सशक्तीकरण को नई गति देते हुए धामी सरकार ने एकल महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की मौजूदगी में बुधवार को देहरादून के मुख्य सेवक सदन, कैंट रोड में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना के तहत कुल 488 महिलाओं को 2.75 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता राशि वितरित की गई। इस दौरान योजना के दूसरे चरण की 212 नई लाभार्थी महिलाओं को स्वरोजगार शुरू करने के लिए पहली किस्त जारी की गई, जबकि पहले से योजना का लाभ ले रही 276 महिलाओं को दूसरी किस्त प्रदान की गई।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर, आत्मविश्वासी और आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है। उन्होंने कहा कि एकल, निराश्रित, परित्यक्ता और विधवा महिलाओं को सम्मानजनक जीवन और स्थायी आजीविका उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। यही कारण है कि मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना के माध्यम से महिलाओं को अपने गांव और क्षेत्र में ही रोजगार स्थापित करने का अवसर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार महिलाओं को रोजगार मांगने वाली नहीं, बल्कि रोजगार देने वाली उद्यमी बनाना चाहती है। इस योजना के माध्यम से महिलाएं कृषि, पशुपालन, डेयरी, सिलाई, ब्यूटी पार्लर, खाद्य प्रसंस्करण, हस्तशिल्प और अन्य छोटे व्यवसाय शुरू कर न केवल अपनी आय बढ़ा रही हैं, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा कर रही हैं। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने के साथ-साथ पलायन रोकने में भी मदद मिलेगी। महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या ने बताया कि योजना के दूसरे चरण में अल्मोड़ा, चंपावत, चमोली, हरिद्वार, रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़, उत्तरकाशी और देहरादून की 212 महिलाओं को 1.55 करोड़ रुपये से अधिक की पहली किस्त जारी की गई है। वहीं देहरादून, नैनीताल और टिहरी की 276 महिलाओं को 1.20 करोड़ रुपये से अधिक की दूसरी किस्त उपलब्ध कराई गई है। उन्होंने बताया कि योजना के तहत अधिकतम दो लाख रुपये तक की परियोजना लागत पर सरकार 75 प्रतिशत तक अनुदान देती है, जबकि शेष 25 प्रतिशत राशि लाभार्थी महिला को स्वयं या अन्य माध्यम से वहन करनी होती है। इस आर्थिक सहयोग से महिलाएं अपने कौशल के अनुरूप व्यवसाय शुरू कर आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। रेखा आर्या ने बताया कि योजना के पहले चरण में 10 फरवरी 2026 को छह जिलों की 484 महिलाओं को 3.45 करोड़ रुपये से अधिक की पहली किस्त जारी की गई थी। अब दूसरे चरण में योजना का विस्तार कर अधिक जिलों और अधिक महिलाओं को इसका लाभ दिया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य अधिक से अधिक पात्र महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। कार्यक्रम के दौरान कई लाभार्थी महिलाओं ने अपने अनुभव भी साझा किए। देहरादून की कांवली रोड निवासी नीलू जैन की कहानी ने सभी को भावुक कर दिया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2022 में कैंसर के कारण उनके पति का निधन हो गया था, जिसके बाद परिवार की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई। मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना से मिली पहली किस्त की सहायता से उन्होंने आगरा के प्रसिद्ध पेठे की मिठाई बनाने का व्यवसाय शुरू किया। आज वह पारंपरिक स्वाद के साथ देहरादून में पेठा तैयार कर बेच रही हैं और अपने परिवार का सफलतापूर्वक पालन-पोषण कर रही हैं। नीलू जैन ने कहा कि सरकार की इस योजना ने उन्हें केवल आर्थिक सहायता ही नहीं दी, बल्कि आत्मविश्वास और सम्मान के साथ नया जीवन शुरू करने का अवसर भी दिया। उनकी सफलता अब अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन रही है। राज्य सरकार का मानना है कि मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना केवल वित्तीय सहायता का कार्यक्रम नहीं, बल्कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाकर आत्मनिर्भर उत्तराखंड के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। आने वाले समय में इस योजना का दायरा और बढ़ाने की तैयारी की जा रही है, ताकि प्रदेश की अधिक से अधिक एकल महिलाएं स्वरोजगार अपनाकर सम्मानजनक और आत्मनिर्भर जीवन जी सकें।