Sep 06, 2026

उत्तराखंड शिक्षा पुरस्कार: उत्कृष्ट शैक्षणिक योगदान के लिए दो शिक्षक सम्मानित

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नई दिल्ली। राष्ट्रीय शिक्षक दिवस के अवसर पर शनिवार को नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में आयोजित राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार-2026 समारोह में उत्तराखंड के दो शिक्षकों ने प्रदेश का गौरव बढ़ाया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय की शिक्षिका मनीषा निगम और पौड़ी जिले के प्रधानाध्यापक गबर सिंह बिष्ट को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया। दोनों शिक्षकों को यह सम्मान शिक्षा के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान, नवाचार और विद्यार्थियों के लिए किए गए प्रयासों के लिए प्रदान किया गया। राष्ट्रीय स्तर के इस सम्मान समारोह में देशभर से चयनित शिक्षकों को सम्मानित किया गया। उत्तराखंड से उच्च शिक्षा और विद्यालयी शिक्षा, दोनों क्षेत्रों में शिक्षकों का चयन होना प्रदेश के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय की शिक्षिका मनीषा निगम का चयन शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग की ओर से नेशनल अवार्ड टू टीचर्स के लिए किया गया। देशभर से चयनित 21 शिक्षकों में मनीषा निगम भी शामिल रहीं। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में शिक्षण और अन्य शैक्षणिक गतिविधियों में उत्कृष्ट योगदान को मान्यता देने वाला यह पुरस्कार शिक्षकों के उल्लेखनीय कार्यों को राष्ट्रीय मंच प्रदान करता है। पुरस्कार के तहत चयनित शिक्षकों को प्रशस्ति-पत्र, 50 हजार रुपये की पुरस्कार राशि और रजत पदक प्रदान किया जाता है। वहीं, पौड़ी जिले के प्रधानाध्यापक गबर सिंह बिष्ट को विद्यालयी शिक्षा के क्षेत्र में उत्तराखंड से एकमात्र शिक्षक के रूप में राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उन्होंने दूरस्थ क्षेत्र में रहकर लंबे समय से विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास किए हैं। गबर सिंह बिष्ट वर्ष 2003 से राजकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय मुस्याखांद, पौड़ी में सेवाएं दे रहे हैं। सीमित संसाधनों वाले दूरस्थ क्षेत्र में उन्होंने शिक्षा को विद्यार्थियों के लिए आसान और रुचिकर बनाने के लिए कई नवाचार किए। प्रधानाध्यापक गबर सिंह बिष्ट ने विद्यार्थियों के बीच गणित और विज्ञान जैसे विषयों को सरल बनाने पर विशेष जोर दिया। उनका प्रयास रहा कि कठिन माने जाने वाले विषयों को केवल किताबों तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उन्हें प्रयोग, तकनीक और रोजमर्रा के उदाहरणों के माध्यम से विद्यार्थियों तक पहुंचाया जाए। उन्होंने शिक्षण प्रक्रिया में डिजिटल प्लेटफॉर्म, आईसीटी, ई-कंटेंट और गूगल मीट जैसे तकनीकी माध्यमों का प्रभावी इस्तेमाल किया। तकनीक के माध्यम से उन्होंने दूरस्थ क्षेत्र के विद्यार्थियों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया।