रुद्रपुर। शिक्षा के मंदिर कहे जाने वाले स्कूलों और बुक सेलर्स के बीच का 'कमीशन वाला गठजोड़' एक बार फिर चर्चा में है। रुद्रपुर के प्रतिष्ठित सरस्वती शिशु मंदिर इंटर कॉलेज से जुड़ा एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने अभिभावकों के गुस्से को सातवें आसमान पर पहुँचा दिया है। आरोप है कि गोपाल पुस्तक भंडार के स्वामी न केवल मनमाने दामों पर किताबों का सेट बेच रहे हैं, बल्कि विरोध करने वाले अभिभावकों के साथ सरेआम अभद्रता और दुर्व्यवहार भी कर रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, नए सत्र के शुरू होते ही बुक सेलर द्वारा निजी स्कूलों को लाखों रुपये का प्रलोभन दिया जाता है। इसके बदले में स्कूल प्रबंधन अभिभावकों पर दबाव बनाता है कि वे किसी विशेष दुकान से ही किताबें खरीदें। यहाँ तक कि कॉपियों पर लगने वाला कवर भी बुक सेलर ही निर्धारित करता है। यह पूरा 'काला खेल' अभिभावकों की जेब ढीली करने के लिए रचा जाता है। सेट न लेने पर बदतमीजी, कॉपियां लेना अनिवार्य अभिभावकों का आरोप है कि गोपाल पुस्तक भंडार पर जबरन 'किताबों का सेट' थोपा जा रहा है। यदि कोई अभिभावक केवल किताबें लेना चाहे और कॉपियां कहीं और से खरीदने की बात करे, तो दुकान स्वामी गोपाल सरकार और उनके कर्मचारी अभद्र व्यवहार पर उतारू हो जाते हैं। अभिभावकों ने बताया कि दुकान पर ऐसा माहौल बनाया जाता है मानो किताबें नहीं, बल्कि कोई अहसान किया जा रहा हो। एनसीईआरटी के साथ निजी प्रकाशकों का बोझ मामला सिर्फ दुर्व्यवहार तक सीमित नहीं है। स्कूल में विद्या भारती और एनसीईआरटी की सस्ती पुस्तकों के साथ-साथ भारी-भरकम कमीशन वाली निजी प्रकाशकों की किताबें भी अनिवार्य कर दी गई हैं। इससे शिक्षा का बजट अचानक बढ़ गया है। अभिभावकों का कहना है कि जब सरकार एनसीईआरटी को बढ़ावा दे रही है, तो निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें क्यों थोपी जा रही हैं? लेकिन कब तक? इस पूरे मामले की गूँज शिक्षा विभाग तक पहुँच चुकी है। प्रभारी शिक्षा अधिकारी ने शिकायत मिलने पर जाँच और सख्त कार्रवाई की बात कही है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि 'यह कार्रवाई कब होगी?' अक्सर देखा गया है कि जाँच के नाम पर फाइलों को दबा दिया जाता है और तब तक पूरा सीजन निकल जाता है, जिसका सीधा फायदा इन बेलगाम बुक सेलर्स को मिलता है।