देहरादून। उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 से पहले प्रदेश की सियासत में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को लेकर एक बार फिर राजनीतिक तापमान बढ़ता दिखाई दे रहा है। हरीश रावत की ओर से सोशल मीडिया पर कांग्रेस के पदों से इस्तीफे की पेशकश किए जाने के बाद भाजपा ने कांग्रेस और रावत पर सीधा हमला बोला है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कहा कि भाजपा उस दिन का इंतजार कर रही है, जब हरीश रावत कांग्रेस को अलविदा कहेंगे। वहीं भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं प्रदेश प्रवक्ता विनोद चमोली ने भी रावत की इस्तीफे की पेशकश को राजनीतिक घटनाक्रम से जोड़ते हुए कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति पर सवाल उठाए हैं।
प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले प्रदेश की सियासत में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को लेकर एक बार फिर राजनीतिक तापमान बढ़ता दिखाई दे रहा है। हरीश रावत की ओर से सोशल मीडिया पर कांग्रेस के पदों से इस्तीफे की पेशकश किए जाने के बाद भाजपा ने कांग्रेस और रावत पर सीधा हमला बोला है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कहा कि भाजपा उस दिन का इंतजार कर रही है, जब हरीश रावत कांग्रेस को अलविदा कहेंगे। वहीं भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं प्रदेश प्रवक्ता विनोद चमोली ने भी रावत की इस्तीफे की पेशकश को राजनीतिक घटनाक्रम से जोड़ते हुए कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति पर सवाल उठाए हैं। महेंद्र भट्ट ने रावत के कदम को कांग्रेस के भीतर अपनी स्थिति मजबूत करने और राजनीतिक दबाव बनाने की रणनीति बताया। उनका कहना है कि हरीश रावत कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं, लेकिन समय-समय पर इस तरह की राजनीतिक परिस्थितियां पैदा होती रही हैं, जिनके जरिए वह पार्टी के भीतर अपनी स्थिति और जनता के बीच अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने का प्रयास करते हैं। चंदन सिंह जीना से जुड़े मामले में ईडी की कार्रवाई को कांग्रेस नेताओं द्वारा चुनावी रंजिश और राजनीतिक प्रतिशोध बताए जाने पर भी भाजपा ने पलटवार किया है। महेंद्र भट्ट ने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय एक स्वायत्त जांच एजेंसी है और उसका काम निरंतर चलता रहता है। उन्होंने कहा कि यूकेएसएसएससी भर्ती प्रक्रिया में शुरुआत से ही अनियमितताओं के आरोप सामने आते रहे हैं और यदि जांच के दौरान किसी व्यक्ति के यहां अवैध संपत्ति या अन्य साक्ष्य मिलते हैं तो उसकी जांच होना स्वाभाविक है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कांग्रेस के चुनावी कार्रवाई वाले तर्क को भी खारिज किया। उनका कहना है कि विधानसभा चुनाव फरवरी में प्रस्तावित हैं और अभी पर्याप्त समय है। ऐसे में हर जांच या कार्रवाई को चुनावी रंजिश से जोड़ना उचित नहीं है। भाजपा का तर्क है कि जांच एजेंसियों को अपना काम करने देना चाहिए और राजनीतिक दलों को जांच के तथ्यों का सामना करना चाहिए। भट्ट ने कहा कि राजनीतिक दलों के नेताओं में यह साहस होना चाहिए कि यदि किसी ने गलत किया है तो उसके खिलाफ कार्रवाई हो। भाजपा नेताओं का कहना है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली सरकार ने भ्रष्टाचार और नकल के खिलाफ सख्त नीति अपनाई है। नकल विरोधी कानून और भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं के मामलों में कार्रवाई को भाजपा अपनी सरकार की प्रमुख उपलब्धियों में गिनाती रही है। भाजपा का आरोप है कि कांग्रेस शासनकाल से जुड़े पुराने मामलों की जांच आगे बढ़ने के बाद विपक्ष राजनीतिक बयानबाजी के जरिए मुद्दे को अलग दिशा देने की कोशिश कर रहा है। पार्टी नेताओं का कहना है कि यदि किसी मामले में जांच एजेंसी कार्रवाई कर रही है तो उसका राजनीतिक विरोध करने के बजाय जांच के निष्कर्ष का इंतजार किया जाना चाहिए। हरीश रावत की इस्तीफे की पेशकश ने इस पूरे घटनाक्रम को और अधिक राजनीतिक बना दिया है। कांग्रेस की ओर से जहां इसे पार्टी के भीतर रावत की भूमिका और मौजूदा परिस्थितियों से जोड़कर देखा जा रहा है, वहीं भाजपा इसे कांग्रेस के आंतरिक संकट का संकेत बता रही है। हालांकि कांग्रेस का कहना है कि ईडी की कार्रवाई को राजनीतिक प्रतिशोध के रूप में देखा जाना चाहिए। कांग्रेस नेताओं का तर्क है कि संबंधित प्रकरण काफी पुराना है और चुनाव से पहले जांच एजेंसियों की सक्रियता सवाल खड़े करती है। पार्टी इसे कांग्रेस नेतृत्व पर दबाव बनाने की कोशिश के तौर पर देख रही है। उत्तराखंड में 2027 का विधानसभा चुनाव अभी दूर है, लेकिन दोनों प्रमुख दलों के बीच राजनीतिक बयानबाजी ने चुनावी माहौल की शुरुआती तस्वीर सामने रख दी है। हरीश रावत लंबे समय से कांग्रेस की उत्तराखंड राजनीति के प्रमुख चेहरों में रहे हैं। ऐसे में उनके पद छोड़ने की पेशकश और उसके बाद भाजपा का सीधा हमला महज बयानबाजी नहीं, बल्कि आने वाले राजनीतिक समीकरणों का संकेत भी माना जा रहा है। एक तरफ कांग्रेस ईडी की कार्रवाई को राजनीतिक प्रतिशोध बता रही है, तो दूसरी तरफ भाजपा इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई बता रही है। इसी बीच हरीश रावत के इस्तीफे की पेशकश ने कांग्रेस के भीतर नेतृत्व और भूमिका को लेकर नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। अब बड़ा सवाल यही है कि हरीश रावत की इस्तीफे की पेशकश महज मौजूदा परिस्थितियों पर प्रतिक्रिया है या उत्तराखंड कांग्रेस की आगामी रणनीति में किसी बड़े बदलाव का संकेत। भाजपा फिलहाल इस घटनाक्रम को कांग्रेस की कमजोरी के रूप में पेश करने में जुटी है। 2027 के चुनावी रण से पहले ईडी, भ्रष्टाचार और हरीश रावत—ये तीनों मुद्दे उत्तराखंड की सियासत में आने वाले दिनों में और बड़ा राजनीतिक हथियार बन सकते हैं।