देहरादून। जनता के सूचना के अधिकार (आरटीआई) से खिलवाड़ करने और अपने कार्य में घोर लापरवाही बरतने वाले लोक सूचना अधिकारियों पर उत्तराखंड सूचना आयोग ने अपना कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। एक महत्वपूर्ण मामले में सुनवाई करते हुए राज्य सूचना आयोग ने लापरवाही बरतने वाले तत्कालीन लोक सूचना अधिकारी को स्थानांतरण (ट्रांसफर) के बावजूद व्यक्तिगत रूप से तलब किया और आयोग के समक्ष उपस्थित होने पर उन्हें जमकर फटकार लगाई। आयोग ने दोटूक शब्दों में कहा कि जनसेवकों का इस प्रकार का गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं किया जाएगा।
सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी को अधूरा और भ्रामक तरीके से उपलब्ध कराना एक लोक सूचना अधिकारी को भारी पड़ गया। उत्तराखंड सूचना आयोग ने मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए अधिकारी के स्थानांतरण के बाद भी उन्हें सुनवाई के लिए तलब किया और कार्यशैली पर जमकर फटकार लगाई। आयोग ने स्पष्ट किया कि लोक सूचना अधिकारियों की ओर से सूचना देने में लापरवाही और आवेदकों को गुमराह करने वाला रवैया किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। राज्य सूचना आयुक्त कुशलानंद कोठियाल ने हरिद्वार निवासी विकास कुमार की अपील पर सुनवाई करते हुए मामले की समीक्षा की। अपीलकर्ता ने ग्राम पंचायत बादीवाला नौकराग्रान्ट से संबंधित कुछ सूचनाएं सूचना के अधिकार के तहत मांगी थीं। संबंधित लोक सूचना अधिकारी की ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारी स्पष्ट और पूर्ण नहीं थी। जानकारी से संतुष्ट नहीं होने पर विकास कुमार ने सूचना आयोग का दरवाजा खटखटाया। सुनवाई के दौरान आयोग के सामने यह बात सामने आई कि लोक सूचना अधिकारी ने आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी तो दी, लेकिन वह स्पष्ट नहीं थी। आयोग ने माना कि सूचना अपूर्ण और भ्रामक होने के कारण अपीलकर्ता को अनावश्यक रूप से आयोग तक आना पड़ा। राज्य सूचना आयुक्त ने अधिकारी की कार्यशैली पर नाराजगी जताते हुए कहा कि लोक अधिकारियों को अपने दायित्वों का गंभीरता से निर्वहन करना चाहिए। सूचना का अधिकार कानून नागरिकों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत सूचना प्राप्त करने का अधिकार देता है और इसमें लापरवाही से आवेदक को परेशानी नहीं होनी चाहिए। मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि संबंधित लोक सूचना अधिकारी का स्थानांतरण हो चुका था। इसके बावजूद आयोग ने उन्हें नोटिस जारी कर सुनवाई के लिए तलब किया। सुनवाई के दौरान आयोग ने अधिकारी को कड़ी फटकार लगाई और भविष्य में इस तरह की लापरवाही नहीं बरतने की चेतावनी दी। आयोग ने स्पष्ट किया कि अधिकारी का स्थानांतरण होने से पूर्व में किए गए कार्यों की जिम्मेदारी समाप्त नहीं होती। सूचना देने में हुई त्रुटि और लापरवाही के लिए संबंधित अधिकारी को जवाब देना होगा। आयोग ने अधिकारी को निर्देश दिए कि अपीलकर्ता को कार्यालय में बुलाकर मांगी गई सूचनाएं बिंदुवार और स्पष्ट रूप से उपलब्ध कराई जाएं। इससे अपीलकर्ता को दोबारा भ्रम की स्थिति का सामना न करना पड़े। राज्य सूचना आयोग ने अधिकारी की त्रुटिपूर्ण कार्यशैली की कड़ी निंदा करते हुए चेतावनी दी कि भविष्य में आरटीआई आवेदनों के निस्तारण में गंभीरता और पारदर्शिता बरती जाए। आयोग के इस रुख से साफ है कि सूचना के अधिकार के मामलों में लापरवाही करने वाले अधिकारियों पर अब सख्ती से जवाबदेही तय की जाएगी।