Jun 12, 2026

सीटीईटी की तर्ज पर अब साल में दो बार होगी यूटीईटी, टीईटी न होने से हजारों सेवारत शिक्षकों की नौकरी पर संकट

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देहरादून। उत्तराखंड के शिक्षा विभाग से शिक्षा जगत और युवाओं के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण खबर सामने आ रही है। केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा की तर्ज पर अब उत्तराखंड सरकार भी राज्य में साल में दो बार उत्तराखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा आयोजित कराने की तैयारी में है। सूबे के शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने इस बात के पुख्ता संकेत दिए हैं।

हालांकि, दूसरी ओर समय पर टीईटी परीक्षा न होने और नियमों की तकनीकी पेचीदगियों के कारण वर्तमान में कार्यरत हजारों बीएड शिक्षकों की नौकरी पर इस समय संकट के बादल मंडरा रहे हैं। शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने साफ किया है कि केंद्र सरकार की व्यवस्था की तरह ही राज्य के युवाओं और शिक्षकों के हित में साल में दो बार यूटीईटी कराने का खाका खींचा जा रहा है। उन्होंने कहा कि माननीय सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुरूप सभी शिक्षक टीईटी की अर्हता समय से पूरी कर सकें, इसके लिए सरकार अन्य विकल्पों पर भी गंभीरता से विचार कर रही है और जल्द ही एक उच्च स्तरीय बैठक कर इस पर अंतिम मुहर लगा दी जाएगी। वर्तमान में साल में केवल एक बार यह परीक्षा आयोजित होती है। शासन से लिखित निर्देश मिलते ही साल में दो बार परीक्षा कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। वर्तमान में विभाग इस बात का बारीकी से परीक्षण करा रहा है कि आखिर कितने कार्यरत शिक्षकों को इस पात्रता परीक्षा को पास करने की आवश्यकता है। इस पूरे मामले के पीछे एक बड़ा तकनीकी पेंच है। दरअसल, 23 अगस्त 2010 से पहले नियुक्त हुए ऐसे शिक्षक जो बीएड डिग्रीधारी हैं, उनके लिए सीटीईटी और यूटीईटी के मौजूदा आवेदन फॉर्म में अलग से कोई विशेष विकल्प नहीं दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख के बाद इन शिक्षकों के लिए टीईटी पास करना अनिवार्य हो चुका है, लेकिन फॉर्म में उचित विकल्प न होने से वे आवेदन नहीं कर पा रहे हैं। इस तकनीकी खामी की वजह से राज्य के हजारों सेवारत शिक्षकों के सामने अपनी सरकारी नौकरी बचाने का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। संकट से घिरे शिक्षक लगातार सरकार से मांग कर रहे हैं कि उनके लिए अलग से एक 'विशेष यूटीईटी' परीक्षा का आयोजन किया जाए। हालांकि, विभागीय सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद के कड़े नियमों के तहत कार्यरत या सेवारत शिक्षकों के लिए अलग से किसी 'विभागीय टीईटी' कराने का कोई कानूनी प्रावधान नहीं है। ऐसे में शिक्षक संगठनों और विशेषज्ञों का मानना है कि इसका एकमात्र व्यावहारिक समाधान यही है कि यूटीईटी प्रथम के सामान्य आवेदन फॉर्म में ही आवश्यक योग्यताओं के साथ 'सेवारत शिक्षक' का एक अतिरिक्त विकल्प जोड़ दिया जाए, ताकि वे आसानी से परीक्षा में बैठ सकें। गौरतलब है कि उत्तराखंड में आखिरी बार यूटीईटी की परीक्षा 27 सितंबर 2025 को आयोजित की गई थी। इसके बाद से राज्य में दोबारा इस परीक्षा का आयोजन नहीं हो सका है, जिससे नए अभ्यर्थियों और पुराने शिक्षकों दोनों का इंतजार लंबा होता जा रहा है। अब साल में दो बार परीक्षा कराने के इस नए विजन से जहां एक ओर युवाओं को हर छह महीने में शिक्षक बनने का मौका मिलेगा, वहीं दूसरी ओर संकट में फंसे हजारों शिक्षकों को भी अपनी नौकरी सुरक्षित करने का एक सुनहरा और त्वरित अवसर मिल सकेगा।