Oct 01, 2026

उत्तराखंड में 'धामी सरकार' का रिपोर्ट कार्ड: 61% मुख्यमंत्री घोषणाएं पूरी, 30% पर काम तेज,पीडब्ल्यूडी बना नंबर-1 विभाग

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देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की घोषणाओं को धरातल पर उतारने को लेकर राज्य प्रशासन पूरी तरह एक्शन मोड में नजर आ रहा है। प्रदेश की कमान संभालने के बाद से अब तक मुख्यमंत्री द्वारा की गई कुल घोषणाओं में से 61 प्रतिशत घोषणाएं पूरी की जा चुकी हैं, जबकि 30 प्रतिशत घोषणाओं पर विभिन्न स्तरों पर तेजी से कार्य जारी है। मंगलवार को सचिवालय में मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान यह उत्साहजनक आंकड़े सामने आए।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की ओर से प्रदेश की कमान संभालने के बाद की गई घोषणाओं में से 61 प्रतिशत घोषणाएं पूरी होने का दावा किया गया है। वहीं करीब 30 प्रतिशत घोषणाओं पर अलग-अलग स्तर पर कार्रवाई जारी है। सचिवालय में मंगलवार को मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री घोषणाओं की प्रगति की तस्वीर सामने आई। बैठक में मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि लंबित घोषणाओं को प्राथमिकता के आधार पर निर्धारित समयसीमा में पूरा किया जाए। समीक्षा के दौरान अधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री अब तक 4611 घोषणाएं कर चुके हैं। इनमें से 2852 घोषणाएं पूरी हो चुकी हैं, जबकि 1397 घोषणाओं पर विभिन्न स्तरों पर कार्रवाई चल रही है। इनमें 59 घोषणाएं ऐसी हैं, जिन्हें आंशिक रूप से पूरा किया जा चुका है। इसके अलावा 447 घोषणाओं का विलोपन या दूसरी समान प्रकृति की घोषणाओं में विलय किया गया है। मुख्यमंत्री घोषणाओं की समीक्षा में सबसे महत्वपूर्ण आंकड़ा लंबित घोषणाओं का सामने आया। अगस्त 2026 तक जहां लंबित घोषणाओं की संख्या 627 थी, वहीं अब यह घटकर 303 रह गई है। यानी लंबित घोषणाओं की संख्या में करीब 50 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने अधिकारियों से कहा कि जिन घोषणाओं पर काम चल रहा है, उन्हें अनावश्यक रूप से लंबित न रखा जाए। विभागों को तय समयसीमा में कार्रवाई पूरी करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी घोषणाएं जिन्हें व्यावहारिक कारणों से पूरा नहीं किया जाना है, उनके विलोपन अथवा समान प्रकृति की किसी अन्य घोषणा में विलय को लेकर भी जल्द निर्णय लिया जाए। घोषणाओं को धरातल पर उतारने के मामले में लोक निर्माण विभाग सबसे आगे रहा। विभाग ने 850 में से 716 घोषणाएं पूरी कर ली हैं। इसके बाद गृह विभाग, शहरी विकास विभाग और धर्मस्व विभाग का स्थान रहा। वहीं नागरिक उड्डयन, पंचायती राज, युवा कल्याण और चिकित्सा स्वास्थ्य विभाग को न्यूनतम प्रदर्शन वाले विभागों की श्रेणी में रखा गया है। इन विभागों में लंबित घोषणाओं को लेकर अब निगरानी और कार्रवाई तेज करने की जरूरत पर जोर दिया गया। मुख्यमंत्री घोषणाओं की समीक्षा का यह आंकड़ा सरकार के लिए उपलब्धि और चुनौती दोनों की तस्वीर सामने रखता है। एक तरफ 2852 घोषणाओं के पूरा होने का दावा है, वहीं 1397 पर अभी कार्रवाई चल रही है। इसके अलावा 303 घोषणाएं ऐसी हैं, जो फिलहाल लंबित हैं। ऐसे में सरकार के सामने इन घोषणाओं को तय समयसीमा में पूरा करने की चुनौती बनी हुई है। इसी दिन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय में हरियाणा भ्रमण पर जा रहे युवाओं से मुलाकात कर उन्हें शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि दूसरे राज्यों के भ्रमण से युवाओं को वहां की संस्कृति, विकास कार्यों और नवाचारी पहलों को नजदीक से समझने का अवसर मिलता है। उन्होंने युवाओं से कहा कि वे दूसरे राज्यों की संस्कृति और विशेषताओं के साथ वहां विकास के लिए अपनाई जा रही कार्यप्रणाली को भी समझें और उपयोगी अनुभवों को उत्तराखंड के संदर्भ में साझा करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस तरह के भ्रमण केवल पर्यटन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि युवाओं को विभिन्न राज्यों की अच्छी पहलों को समझने और उनसे सीखने का अवसर देते हैं। धामी ने ‘सेवा संकल्प अभियान’ का उल्लेख करते हुए कहा कि अभियान का उद्देश्य समाज के विभिन्न वर्गों और युवाओं को सेवा, जनभागीदारी तथा विकसित भारत के संकल्प से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि युवाओं के बीच राज्यों के स्तर पर संवाद बढ़ने से आपसी अनुभव साझा करने और उपयोगी योजनाओं को समझने का प्रभावी माध्यम तैयार हो सकता है। एक तरफ सचिवालय में मुख्यमंत्री घोषणाओं को समयबद्ध पूरा करने पर जोर दिया गया, वहीं दूसरी ओर युवाओं को दूसरे राज्यों की अच्छी पहलों से सीखने का संदेश दिया गया। सरकार की घोषणाओं और उनके क्रियान्वयन के बीच यही अंतर अब प्रशासनिक समीक्षा का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।