रुद्रपुर। जब समाज को नई राह दिखाने वाले और हजारों विद्यार्थियों का भविष्य गढ़ने वाले ही छोटे-छोटे विवादों में उलझकर कानून को हाथ में लेने लगें, तो समाज की दिशा और दशा पर सवाल उठना लाजिमी है। ट्रांजिट कैंप थाना क्षेत्र में बीते दिनों कुछ ऐसा ही वाक्या सामने आया, जहाँ एक निजी विद्यालय के प्रधानाध्यापक और प्रतिष्ठित बंगाली कल्याण समिति के पदाधिकारी मामूली विवाद में मर्यादा भूलकर हाथापाई पर उतारू हो गए। परिणाम स्वरूप, जिन हाथों में कलम और सामाजिक जिम्मेदारी होनी चाहिए थी, उन्हें पुलिस ने शांति भंग की धाराओं में गिरफ्तार कर हवालात पहुंचा दिया।
जानकारी के अनुसार, विवाद की जड़ दो निजी बुक सेलर्स के बीच का आपसी व्यावसायिक मतभेद था। सोशल मीडिया पर पिछले कुछ दिनों से वायरल हो रहे इस विवाद ने उस वक्त हिंसक रूप ले लिया जब रविंद्र नगर स्थित 'गोपाल पुस्तक भंडार' के स्वामी ने ट्रांजिट कैंप स्थित 'दिव्या बुक स्टोर' के स्वामी मनीष गुप्ता को अपने कार्यक्षेत्र में बुलाया। बातचीत से शुरू हुआ यह मामला देखते ही देखते गाली-गलौज और मारपीट में बदल गया। हैरत की बात तब हुई जब इस लड़ाई में बीच-बचाव करने या मामले को सुलझाने के बजाय, समाज के जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग भी कूद पड़े। आरोप है कि एक निजी स्कूल के प्रधानाचार्य और बंगाली कल्याण समिति के एक उच्च पदाधिकारी ने भी इस विवाद में जमकर लात-घूंसे चलाए। मामले की सूचना मिलते ही वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देशों का पालन करते हुए ट्रांजिट कैंप पुलिस टीम ने तत्काल मौके पर मोर्चा संभाला। हालांकि, गोपाल पुस्तक भंडार के मुख्य स्वामी मौके से बच निकले, लेकिन पुलिस ने उनके चचेरे भाई और विवाद में शामिल निजी स्कूल के प्रधानाचार्य शिवपद सरकार को धर दबोचा। वहीं दूसरे पक्ष से मनीष गुप्ता भी पुलिस की गिरफ्त में आए। दोनों आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 170, 126, 135 और 135(3) के तहत कार्रवाई की गई है। पुलिस ने सभी को न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें जमानत मिल गई।
घटना के बाद से यह मामला पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। खास तौर पर इसलिए कि इसमें एक ऐसे प्रधानाचार्य का नाम सामने आया है, जिन पर हजारों विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण की जिम्मेदारी होती है। समाज के लोग इस बात पर चिंता जता रहे हैं कि जब शिक्षा और समाज के मार्गदर्शक ही इस तरह के विवादों में शामिल होंगे, तो युवाओं को क्या संदेश जाएगा। हालांकि कानूनी रूप से सभी आरोपियों को जमानत मिल चुकी है, लेकिन सामाजिक दृष्टिकोण से यह घटना कई सवाल खड़े कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों को अपने आचरण में अधिक संयम और जिम्मेदारी दिखानी चाहिए, क्योंकि उनका व्यवहार समाज और आने वाली पीढ़ियों के लिए उदाहरण बनता है। फिलहाल पुलिस मामले पर नजर बनाए हुए है और क्षेत्र में शांति व्यवस्था कायम है, लेकिन यह घटना लंबे समय तक लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी रहेगी। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब बच्चों को संस्कार सिखाने वाले प्रधानाचार्य और समाज की सेवा का दंभ भरने वाले पदाधिकारी ही सड़क पर गुंडागर्दी करेंगे,तो युवा पीढ़ी को क्या संदेश जाएगा? फिलहाल, पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि अपराध और शांति भंग करने वालों के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी, चाहे अपराधी कितना भी रसूखदार क्यों न हो।