Oct 15, 2026
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उत्तराखंड कांग्रेस हुंकार: एसआईआर के विरोध में चुनाव आयोग के बाहर जोरदार प्रदर्शन,आगामी चुनावों के लिए कार्य विभाजन पर दिल्ली में मंथन

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नई दिल्ली। उत्तराखंड में वोटर लिस्ट के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण की प्रक्रिया को लेकर सूबे की सियासत गरमा गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं ने देहरादून से दिल्ली का रुख करते हुए भारत निर्वाचन आयोग के मुख्यालय के बाहर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान कांग्रेस नेताओं ने लोकतांत्रिक व्यवस्था की रक्षा और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया सुनिश्चित करने की मांग को लेकर आयोग को एक ज्ञापन भी सौंपा।

दिल्ली स्थित चुनाव आयोग कार्यालय के बाहर एकत्र हुए उत्तराखंड कांग्रेस के दिग्गज नेताओं ने सरकार और निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को लेकर अपनी गंभीर चिंताएं जाहिर कीं। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि एसआईआर की आड़ में लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन किया जा रहा है। नेताओं ने हाथों में तख्तियां लेकर जमकर नारेबाजी की और ऑनलाइन दर्ज की जा रही आपत्तियों को लेकर अपनी रणनीतिक रणनीति साझा की। प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य आगामी चुनाव से पहले वोटर लिस्ट में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित कराना रहा। प्रदर्शन के साथ-साथ दिल्ली में उत्तराखंड कांग्रेस की भावी चुनावी तैयारियों पर भी हाई-लेवल बैठक हुई। आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल की नवगठित टीम के सदस्यों के बीच जिम्मेदारियों के बंटवारे को लेकर गहन विचार-विमर्श किया गया। कांग्रेस के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री केसी वेणुगोपाल और प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा की अध्यक्षता में हुई इस महत्वपूर्ण बैठक में प्रदेश के तमाम दिग्गजों ने हिस्सा लिया। हाल ही में घोषित हुई प्रदेश कांग्रेस कमेटी की जंबो कार्यकारिणी (जिसमें 24 उपाध्यक्ष, 36 महासचिव और 107 सचिव शामिल हैं) को धरातल पर कैसे सक्रिय किया जाए, इस पर अंतिम मुहर लगाई जा रही है। बैठक में शामिल प्रमुख चेहरे: प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष प्रीतम सिंह, चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष हरक सिंह रावत और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा। कार्यकारिणी के प्रत्येक पद के सापेक्ष काम का बंटवारा करना, SIR प्रक्रिया के तहत हो रही गड़बड़ियों पर ऑनलाइन आपत्तियां दर्ज कराने की रणनीति तय करना और बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी सौंपना। दिल्ली में हुए इस दोहरे घटनाक्रम से साफ है कि उत्तराखंड कांग्रेस अब पूरी तरह से चुनावी मोड में आ चुकी है और आयोग से लेकर जमीन तक सरकार को घेरने की रणनीति पर काम कर रही है।