Sep 10, 2026

उत्तराखंड खेल विभाग में हड़कंप: 3.50 लाख से ज्यादा खिलाड़ियों का डाटा खतरे में,कंपनी ने पोर्टल के आईडी व पासवर्ड बदले

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देहरादून। उत्तराखंड खेल विभाग से जुड़ी एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आई है। राष्ट्रीय खेलों के दौरान पोर्टल और मोबाइल ऐप विकसित करने वाली निजी कंपनी 'खेब टेक स्ट्राटेजी प्राइवेट लिमिटेड' ने विभाग को बिना बताए पोर्टल के यूजर आईडी और पासवर्ड बदल दिए हैं। इस कदम के बाद से विभाग में हड़कंप मच गया है, क्योंकि इस वक्त 3.50 लाख से अधिक खिलाड़ियों का महत्वपूर्ण और संवेदनशील डाटा इसी कंपनी के पास मौजूद है। अब इस डाटा के चोरी होने और इसके दुरुपयोग की गंभीर आशंका जताई जा रही है।

प्रदेश में खिलाड़ियों से जुड़े डिजिटल डेटा की सुरक्षा को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। राष्ट्रीय खेलों के दौरान खेल विभाग के लिए पोर्टल और मोबाइल ऐप विकसित करने वाली कंपनी द्वारा यूजर आईडी और पासवर्ड बदल दिए जाने के बाद करीब 3.50 लाख से अधिक खिलाड़ियों के डेटा की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। विभागीय स्तर पर आशंका जताई जा रही है कि कंपनी के पास मौजूद खिलाड़ियों का डेटा चोरी या उसके संभावित दुरुपयोग का खतरा हो सकता है। जानकारी के मुताबिक राष्ट्रीय खेलों के समय खेल विभाग ने खेब टेक स्ट्राटेजी प्राइवेट लिमिटेड को पोर्टल और ऐप विकसित करने का काम सौंपा था। तैयार किए गए पोर्टल और ऐप को बाद में सूचना प्रौद्योगिकी विकास एजेंसी (आईटीडीए) के सर्वर पर अपलोड किया जाना था। इसी हैंडओवर प्रक्रिया से पहले कंपनी की ओर से पोर्टल के यूजर आईडी और पासवर्ड आदि में बदलाव किए जाने की बात सामने आई है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि इस सिस्टम में बड़ी संख्या में खिलाड़ियों का व्यक्तिगत और खेल संबंधी डेटा मौजूद बताया जा रहा है। मुख्यमंत्री सीएम चैंपियंस ट्रॉफी के लिए करीब 3.50 लाख खिलाड़ियों ने आवेदन किया था। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक सितंबर को इस योजना का उद्घाटन किया था। ऐसे में इस योजना से जुड़े खिलाड़ियों का डेटा भी सुरक्षा के दायरे में आ गया है। इसके अलावा मुख्यमंत्री उदीयमान खिलाड़ी उन्नयन खेल छात्रवृत्ति योजना से संबंधित डेटा भी कंपनी के पास होने की जानकारी सामने आई है। पिछले वर्ष इस योजना के तहत करीब 3900 खिलाड़ियों को लगभग 11.25 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति दी गई थी। नए सिरे से भी खिलाड़ियों का डेटा पोर्टल पर दर्ज किया गया था। इससे डेटा की सुरक्षा को लेकर विभागीय चिंता और बढ़ गई है। सूत्रों के अनुसार विभाग ने कंपनी को उसके कार्य के लिए करीब 80 फीसदी तक भुगतान कर दिया था। शेष भुगतान हैंडओवर प्रक्रिया पूरी होने के बाद किया जाना था। इसी बीच कंपनी द्वारा बिना पूर्व सूचना के आईडी और पासवर्ड बदलने की बात सामने आने से विभाग में हलचल है। मामले की गंभीरता इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि बताया जा रहा है कि संबंधित कंपनी को अब मेघालय में होने वाले राष्ट्रीय खेलों के लिए भी पोर्टल और ऐप विकसित करने का ठेका मिला है। ऐसे में उत्तराखंड के खिलाड़ियों के डेटा की सुरक्षा के साथ-साथ डिजिटल सिस्टम की निगरानी और जिम्मेदारी तय करने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि खिलाड़ियों का डेटा वास्तव में चोरी हुआ है या नहीं। लेकिन आईडी-पासवर्ड बदलने की घटना ने डेटा सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं। विभाग के सामने अब डेटा की सुरक्षित वापसी, सिस्टम का नियंत्रण और खिलाड़ियों की जानकारी के संभावित दुरुपयोग को रोकना बड़ी चुनौती बन गया है।