Jul 21, 2026

QDENGA वैक्सीन से भारत के लाखों लोगों को मिलेगा फायदा

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नई दिल्ली। हर वर्ष मानसून के साथ देशभर में डेंगू के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी देखने को मिलती है। बारिश के मौसम में लाखों लोग इस मच्छरजनित बीमारी की चपेट में आते हैं और अस्पतालों में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ जाती है। कई मामलों में डेंगू जानलेवा भी साबित होता है। ऐसे में भारत के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। देश में पहली बार डेंगू से बचाव के लिए एक वैक्सीन को मंजूरी मिल गई है। जापान की प्रमुख फार्मा कंपनी Takeda द्वारा विकसित QDENGA (क्यूडेंगा) वैक्सीन को भारत के ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने 4 से 60 वर्ष की आयु के लोगों के लिए मंजूरी प्रदान की है। यह भारत में डेंगू से बचाव के लिए स्वीकृत पहली वैक्सीन है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे लगवाने से पहले यह जांच कराने की आवश्यकता नहीं होगी कि व्यक्ति को पहले कभी डेंगू हुआ है या नहीं। यानी जिन लोगों को पहले डेंगू हो चुका है और जिन्हें कभी डेंगू नहीं हुआ, दोनों ही इस वैक्सीन का लाभ ले सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार QDENGA की दो डोज लगाई जाएंगी। पहली और दूसरी डोज के बीच तीन महीने का अंतर रखा जाएगा।

यह वैक्सीन त्वचा के नीचे (सबक्यूटेनियस) दी जाएगी। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह टीका डेंगू संक्रमण के जोखिम को कम करने के साथ-साथ गंभीर मामलों और अस्पताल में भर्ती होने की संभावना को भी काफी हद तक घटा सकता है। भारत दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां डेंगू का सबसे अधिक बोझ है। अनुमान के अनुसार दुनिया के कुल डेंगू मामलों का लगभग एक-तिहाई हिस्सा भारत में सामने आता है। पिछले दो दशकों में देश में डेंगू के मामलों में कई गुना वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2025 में देशभर में 1.13 लाख से अधिक डेंगू के मामले आधिकारिक रूप से दर्ज किए गए थे, हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है क्योंकि कई मामले रिपोर्ट नहीं हो पाते। डेंगू वायरस के चार अलग-अलग प्रकार (सीरोटाइप) होते हैं और किसी एक प्रकार से संक्रमित होने के बाद भी व्यक्ति अन्य प्रकारों से दोबारा संक्रमित हो सकता है। QDENGA को इस तरह विकसित किया गया है कि यह डेंगू वायरस के सभी चारों प्रकारों के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करने में सक्षम हो। यही इसकी सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक मानी जा रही है। कंपनी के अनुसार इस वैक्सीन पर अब तक दुनिया के सबसे बड़े क्लीनिकल अध्ययनों में से एक किया गया है। 28 हजार से अधिक लोगों पर किए गए परीक्षणों में दूसरी डोज के 12 महीने बाद यह वैक्सीन डेंगू से बचाव में लगभग 80.2 प्रतिशत प्रभावी पाई गई।

वहीं डेंगू के कारण अस्पताल में भर्ती होने के जोखिम को 90.4 प्रतिशत तक कम करने में भी यह सफल रही। लंबे समय तक किए गए अध्ययन में भी इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। आंकड़ों के अनुसार साढ़े चार वर्ष बाद भी अस्पताल में भर्ती होने से बचाव में इसकी प्रभावशीलता 84.1 प्रतिशत रही, जबकि सात वर्षों तक इसकी सुरक्षा और प्रभावशीलता बरकरार रहने के प्रमाण मिले हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) भी QDENGA की सिफारिश कर चुका है। संगठन का मानना है कि जिन देशों में डेंगू का संक्रमण व्यापक है, वहां इस वैक्सीन को सार्वजनिक टीकाकरण कार्यक्रम का हिस्सा बनाया जा सकता है। QDENGA को WHO की प्रीक्वालिफिकेशन भी प्राप्त है, जो इसकी गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभावशीलता को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप प्रमाणित करती है। भारत के अलावा इस वैक्सीन को अब तक 43 देशों में मंजूरी मिल चुकी है। कंपनी के अनुसार दुनिया भर में इसकी 3.2 करोड़ से अधिक डोज वितरित की जा चुकी हैं। ब्राजील, अर्जेंटीना, कोलंबिया और इंडोनेशिया जैसे देशों ने इसे अपने सार्वजनिक टीकाकरण कार्यक्रम में भी शामिल किया है।