Jun 14, 2026

छात्रों के साथ सहयोगात्मक रवैया अपनाएं कंडक्टर, उत्तराखंड परिवहन विभाग ने दिए कड़े निर्देश

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देहरादून। नीट-यूजी 2026 पुनर्परीक्षा में शामिल होने जा रहे उत्तराखंड के हजारों अभ्यर्थियों के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार ने बड़ी राहत की घोषणा की है। परीक्षा केंद्रों तक पहुंचने में छात्रों को किसी प्रकार की आर्थिक परेशानी का सामना न करना पड़े, इसके लिए राज्य सरकार ने उत्तराखंड परिवहन निगम (रोडवेज) की साधारण श्रेणी की बसों में निशुल्क यात्रा सुविधा उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। यह विशेष सुविधा 21 जून को प्रस्तावित नीट-यूजी री-एग्जाम को ध्यान में रखते हुए लागू की गई है। परिवहन निगम के अनुसार राज्य के स्थायी निवासी अभ्यर्थी 19 जून से 23 जून तक रोडवेज की साधारण बसों में बिना किराया दिए यात्रा कर सकेंगे। इस निर्णय से विशेष रूप से दूरस्थ पर्वतीय और ग्रामीण क्षेत्रों से परीक्षा केंद्रों तक पहुंचने वाले छात्रों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

उत्तराखंड परिवहन निगम की प्रबंध निदेशक रीना जोशी ने बताया कि छात्रों को इस सुविधा का लाभ उठाने के लिए किसी अतिरिक्त पंजीकरण या विशेष दस्तावेज की आवश्यकता नहीं होगी। यात्रा के दौरान केवल नीट-यूजी 2026 का वैध प्रवेश पत्र (एडमिट कार्ड) दिखाना होगा। एडमिट कार्ड को ही यात्रा टिकट के रूप में मान्यता दी गई है और इसी आधार पर छात्रों को निशुल्क यात्रा की सुविधा प्रदान की जाएगी। परिवहन निगम ने स्पष्ट किया है कि यह सुविधा केवल साधारण श्रेणी की रोडवेज बसों में ही लागू रहेगी। एसी, वॉल्वो तथा अन्य विशेष श्रेणी की बसों में यात्रा करने वाले अभ्यर्थियों को सामान्य नियमों के अनुसार किराया देना होगा। निगम मुख्यालय की ओर से राज्य के सभी डिपो प्रबंधकों, चालकों और परिचालकों को इस संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं। निर्देशों में कहा गया है कि परीक्षा देने जा रहे छात्रों के साथ सहयोगात्मक व्यवहार किया जाए और उन्हें किसी प्रकार की असुविधा न होने दी जाए। दूरदराज क्षेत्रों से आने वाले अभ्यर्थियों को प्राथमिकता के आधार पर सीट उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि वे समय पर अपने परीक्षा केंद्रों तक पहुंच सकें। हर वर्ष राज्य के हजारों छात्र मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट में शामिल होते हैं। इनमें बड़ी संख्या ऐसे विद्यार्थियों की होती है, जिन्हें अपने घरों से परीक्षा केंद्र तक पहुंचने के लिए कई घंटे की यात्रा करनी पड़ती है। पर्वतीय जिलों के अनेक छात्रों को बस बदलकर लंबी दूरी तय करनी पड़ती है, जिससे उनके ऊपर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है। ऐसे में राज्य सरकार का यह निर्णय छात्रों और उनके अभिभावकों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। शिक्षा और युवा हितों को प्राथमिकता देने की दिशा में उठाए गए इस कदम की विभिन्न सामाजिक संगठनों और अभिभावकों ने भी सराहना की है। माना जा रहा है कि इससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के विद्यार्थियों को विशेष लाभ मिलेगा और वे बिना किसी अतिरिक्त खर्च की चिंता के परीक्षा में शामिल हो सकेंगे। सरकार के इस फैसले ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि राज्य में शिक्षा और युवाओं के भविष्य को लेकर संवेदनशीलता के साथ निर्णय लिए जा रहे हैं। अब अभ्यर्थियों को केवल अपनी तैयारी पर ध्यान केंद्रित करना है, जबकि परीक्षा केंद्र तक पहुंचने की चिंता सरकार ने काफी हद तक कम कर दी है।