Oct 17, 2026
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डिजिटल युग में अपराध का नया अवतार: 'होम डिलीवरी' पर मिल रही अवैध शराब,जोमैटो-स्विगी की तर्ज पर चल रहा काला कारोबार

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बढ़ते आधुनिक युग के साथ-साथ अपराध और अपराधियों का तरीका भी पूरी तरह अपग्रेड हो चुका है। आज के हाईटेक दौर में अपराधी कानून को चकमा देने के लिए नए-नए तकनीकी हथकंडे अपना रहे हैं। कुछ ऐसा ही चौंकाने वाला और चिंताजनक हाल इन दिनों जनपद ऊधम सिंह नगर के जिला मुख्यालय रुद्रपुर में देखने को मिल रहा है। यहाँ अवैध शराब तस्करों ने अपनी बिक्री बढ़ाने के लिए फूड डिलीवरी ऐप ‘जोमैटो’ और ‘स्विगी’ की तर्ज पर काम करना शुरू कर दिया है। बस एक फोन घुमाइए और अवैध शराब सीधे आपके घर के दरवाजे पर हाजिर!

आधुनिक तकनीक ने जहां आम आदमी की जिंदगी को आसान बनाया है, वहीं अपराध की दुनिया ने भी तकनीक का इस्तेमाल अपने तौर-तरीकों को बदलने में शुरू कर दिया है। कभी चोरी-छिपे होने वाला कारोबार अब मोबाइल फोन, मैसेजिंग और होम डिलीवरी जैसे तरीकों का सहारा लेने लगा है। ऊधम सिंह नगर के जिला मुख्यालय रुद्रपुर में अवैध शराब की बिक्री को लेकर सामने आ रही शिकायतें इसी बदलते तौर-तरीके की ओर इशारा करती हैं। आरोप है कि कुछ अवैध शराब विक्रेता ग्राहकों तक शराब पहुंचाने के लिए होम डिलीवरी की सुविधा तक देने लगे हैं। बताया जा रहा है कि ग्राहकों को मोबाइल फोन के जरिए संपर्क करने और ऑर्डर देने की सुविधा दी जा रही है। इसके बाद शराब कथित तौर पर ग्राहक के बताए स्थान तक पहुंचाने का इंतजाम किया जाता है। यानी जिस कारोबार को कानून की नजर से बचकर चलना चाहिए, उसके लिए अब कथित तौर पर घर बैठे ऑर्डर और डिलीवरी का रास्ता अपनाया जा रहा है। यदि ये आरोप सही हैं तो यह केवल अवैध शराब की बिक्री का मामला नहीं, बल्कि बदलते अपराधी तौर-तरीकों के सामने सरकारी निगरानी व्यवस्था की चुनौती भी है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर ऐसे कारोबार को संचालित करने वालों के हौसले क्यों बढ़ रहे हैं? स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी है कि कार्रवाई होने के बाद कुछ मामलों में आरोपी जल्द ही कानूनी प्रक्रिया के तहत बाहर आ जाते हैं और इसके बाद उनका कथित कारोबार फिर शुरू हो जाता है। हालांकि किसी व्यक्ति के खिलाफ आरोप सिद्ध होना न्यायालय की प्रक्रिया का विषय है, लेकिन बार-बार सामने आने वाली शिकायतें आबकारी और अन्य संबंधित विभागों की निगरानी व्यवस्था पर सवाल जरूर खड़े करती हैं। मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि अवैध शराब केवल राजस्व का नुकसान नहीं है। बिना लाइसेंस या निर्धारित मानकों के शराब की बिक्री होने पर उसकी गुणवत्ता और स्रोत को लेकर भी गंभीर सवाल पैदा होते हैं। ऐसी स्थिति में उपभोक्ताओं की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा बन जाती है। इसके अलावा मोबाइल आधारित बिक्री का नेटवर्क युवाओं और घरों तक शराब की पहुंच को आसान बना सकता है यह एक ऐसी चुनौती है, जिस पर प्रशासन को गंभीरता से विचार करना होगा। इस पूरे मामले में आबकारी विभाग का पक्ष भी सामने आया है। जनपद में तैनात आबकारी निरीक्षक ने बताया कि अवैध शराब बेचने वालों के खिलाफ विभाग लगातार कार्रवाई कर रहा है। उन्होंने कहा कि नई जानकारी के आधार पर ऐसे लोगों को चिन्हित कर कार्रवाई की जाएगी। क्षेत्र में अवैध शराब की बिक्री पर पूरी तरह प्रतिबंध है और इस तरह की गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ विभाग आगे भी कार्रवाई जारी रखेगा। अब जरूरत केवल छिटपुट कार्रवाई की नहीं, बल्कि अवैध शराब की बिक्री के बदलते नेटवर्क को समझने की है। यदि मोबाइल फोन के जरिए ऑर्डर और घर तक डिलीवरी का नेटवर्क संचालित हो रहा है तो उसके पीछे मौजूद पूरी कड़ी की पहचान जरूरी है। सवाल यही है कि क्या विभाग कार्रवाई के पारंपरिक तरीके से आगे बढ़कर इस कथित ‘हाईटेक’ अवैध शराब नेटवर्क की जड़ तक पहुंच पाएगा?